Friday, 24 March 2017

रावर दुर्ग:-

रावर दुर्ग:-


रावर राजकुमार जैसिया बच कर रावर दुर्ग लौटा। वहां राजा दाहर की रानी बाई ने राजकुमार जैसिया को भावी संघर्ष करने ब्राह्मणाबाद भेज दिया और स्वयं ने मोर्चा लिया । मोहम्मद कासिम ने रावर दुर्ग की जा घेरा और युद्ध शुरू हुआ परन्तु हार निश्चय जान रानी बाई ने सारी भारतीय स्त्रियों के साथ जौहर स्नान किया ।

भारत के इतिहास का यह प्रथम जौहर था। इसके बाद हजारों भारतीयों ने अरबी मुसलमानों से विकट युद्ध कर अपना कर्तव्य पूरा कर दिया ।

रावर दुर्ग के बाद मोहम्मद कासिम ने सिंध के दूसरे प्रदेशों पर अभियानों में सफलता पाई।राजकुमार जैसिया ने ब्राम्हणबाद में 6 महीने और बाद में जीवनभर संघर्ष किया और बड़ी बहादुरी और देश भक्ति का परिचय दिया और अन्त में काम आया । भारतीयों का पुनर्जागरण (715 ई. से 733-41 ई.) के मध्य कोकनान और अर्लौर के जाट और मेढ़ हिन्दुओं ने अरबी सुल्तानों से जम कर लोहा लिया था । जगह-जगह भारतीयों ने अपने शक्ति केन्द्र बना लिए ।

871 ई. तक सिंध प्रदेश से खलीफा का नियन्त्रण जाता रहा । 912-976 ई. मध्य के अरब यात्री वर्णनों से पता चलाता है कि सिंध में केवल मुल्तान और मन्सूरा पर ही अरबों का राज बचा था ।
915 ई. में अलमसूदी लिखता है कि सिंध में अरब इसलिए बच गए क्योंकि जब भी भारतीय सेना आने लगती है मुसलमान मुल्तान के प्रसिद्ध मंदिर को तोड़ने की धमकी देते थे इसलिये सेनाएं रुक जाती थी । अंग्रेज इतिहासकार वूल्जे हेग लिखते हैं कि इस्लाम की जोशीली धारा जो सिंध और निचले पंजाब को डुबोने आई थी केवल एक नाले के रूप में रह गई। ' (कैम्ब्रिज हिस्ट्री ऑफ इण्डिया तृतीय) ।

सिंध विजय के 150 वर्ष बाद अरब व्यापारी सुलेमान लिखता है कि भारत और चीन में न तो किसी ने इस्लाम स्वीकार किया और ना ही कोई अरबी बोल सकता है ।

(पूर्ववर्ती मुस्लिम आक्रान्ताओं का भारतीयों द्वारा प्रतिरोध - 1206 ई. तक - डॉ. रामगोपाल मिश्र, पीएच.डी. स्वीकृत शोध ग्रंथ, मेरठ विश्वविद्यालय)

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