Thursday, 23 February 2017

राजा नागभट्ट प्रथम प्रतिहार (रघुवंशी) उज्जैन (725-756)

राजा नागभट्ट प्रथम प्रतिहार (रघुवंशी)
उज्जैन (725-756)


सिंध में खलीफा के प्रतिनिधि जुनैद के समय अरब सेनापति हबीब मर्रा ने उज्जैन पर जब आक्रमण किया वहां राजा नागभट्ट प्रथम ने उसका कारगर मुकाबला किया । नागभट्ट का राज्य उज्जैन से सिंधु सागर (अरब सागर) तक फैला हुआ था ।
अंग्रेजों ने सिंधु सागर का नाम अरब सागर किया था । भोज ग्वालियर प्रशस्ति में नागभट्ट द्वारा मुसलमानों को हटाने का उल्लेख है । प्रशस्तिकार लिखता है कि धर्म के नाशक शक्तिशाली मुसलमान राजा की सेना द्वारा पीङित जनता की प्रार्थना पर नागभट्ट भगवान नारायण के सामने प्रकट हुआ । शिलालेखों के अनुसार दंतिदुर्ग राष्ट्रकुट राठौड़ ने नागभट्ट की सहायता की थी ।

राजा नागभट्ट ने इसके अतिरिक्त जिन प्रदेशों पर अरबों ने अधिकार कर लिया था उन्हें फिर आजाद कर लिया । इसकी पुष्टि भङौच के चौहान राजा भतृवडढ के 756 ई. 0 के हांसोट अभिलेख से होती है ।
अरब इतिहासकार बिलाजुरी लिखता है कि सिंध के सूबेदार जुनैद के बाद तमीम जब सूबेदार बना तो "मुसलमानों" को हिन्द के कई प्रदेशों से पीछे हटना पङा ।"

नागभट्ट प्रथम द्वारा स्थापित प्रतिहार साम्राज्य मुसलमानों के भारत विजय से पूर्व का सबसे अन्तिम महान साम्राज्य था । एक शताब्दी तक इस साम्राज्य ने भारत की मुसलमानों से रक्षा की ।
यह प्रतिहार साम्राज्य ही था जिसने अरब आक्रमण का इतनी सफलता से एक शताब्दी तक सामना किया । यह उनकी भारतीय स्वतंत्रता की महान सेवा थी ।

प्रतिहार साम्राज्य की शक्ति और संगठन का सबसे प्रमाणित वर्णन अरब के इतिहासकारों ने किया है । हेबल ने लिखा है कि प्रतिहारों ने जो दीवार खङी कर दी थी उसको तोङकर अरब भारत में प्रवेश नहीं कर सके ।

The age of Imperial Kannauj- Bhartiya Vidhya Bhawan
( सल्तनत काल में हिन्दू प्रतिरोध - डा. अशोक कुमारसिंह, बनारस हिन्दी विश्वविद्यालय वाराणसी की PHD हेतु स्वीकृत शोध ग्रन्थ , पृष्ठ 17,18,19)

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