Friday, 24 March 2017

#राजपुताना बनाम #राजस्थान


आजकल फेसबुक और अन्य सोशल मीडिया माध्यमों पर ऐसे बन्नाओं की भारी भीड़ उमड़ी हुई है जो एक दूजे की देखादेखी में "जय राजपुताना-जय राजपुताना" या फिर "राजपुताना स्थापित करेंगे" आदि लिखते रहते हैं। "जय राजपुताना" लिखना या नारा लगाना कोई गलत बात नहीं पर साथ में यह संदेश देना की #राजस्थान लोकतान्त्रिक व्यवस्था द्वारा थोंपा हुआ नाम है ?
यह एक बड़ी भ्रान्ति है। ऐसा लिखने वालों को दरअसल मालूम ही नहीं है कि राजपुताना और राजस्थान में असल फर्क क्या है? 

राजपुताना अपने आप में छोटी भौगोलिक एजेंसी थी, जबकि राजस्थान उसके मुकाबले बहुत बड़ा है। कुछ भाग वर्तमान गुजरात/मध्यप्रदेश में चला गया पर बहुत सा आ भी गया। यह मेवाड़ के महाराणा भूपाल सिंह जी, महाराजा हनवंत सिंह जी और महाराजा सवाई मान सिंह जी की सूझबूझ थी जो वर्तमान राजस्थान बना।

भूपाल सिंह जी ने ही राजपूताने का नाम बदल कर राजस्थान रखवाया जिसमे ब्रज/मेवात को भी जोड़ा गया। दीर्धकालिक दृष्टि से उनका विज़न अच्छा था, क्योंकि फ़ेडरल स्टेट में आर्थिक तंत्र और प्रशासन कैसे चलेगा वह उन्हें भली भांति मालूम था। तो फिर आज कल बन्ने फिर से राजपुताना स्थापित करने पर क्यूँ तुले हैं?

राजस्थान नाम भी कोई थोंपा हुआ नाम नहीं है, यह मेवाड़ महाराणा की इच्छा अनुसार रखा गया था। उनकी रियासत में आजादी से पूर्व ही बैंक ऑफ़ राजस्थान था, वहीँ से #राजस्थान नाम लिया गया है। आज कल बैंक ऑफ़ राजस्थान का विलय आईसीआईसीआई बैंक में हो गया है।
साभार - Jitender S Shekhawat

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