Friday, 11 November 2016

गाँव

गाँव
 
अनपढ मेरे गाँव का गाय चराने जाये,
पढ़ा-लिखा इस शहर का कुत्ते को टहलाये ।
अनपढ मेरे गाँव का मेहनत "की" रोटी खाये,
पढ़ा-लिखा इस शहर का मेहनत "से" रोटी खाये ।

अनपढ मेरे गाँव का मेहमान को भगवान माने,
पढ़ा-लिखा इस शहर का भगवान को ही ना जाने ।

अनपढ मेरे गाँव का देश पर जान लुटाये,
पढ़ा-लिखा इस शहर का बस अपनी जान बचाये ।

अनपढ मेरे गाँव का देश की भूख मिटाये,
पढ़ा-लिखा इस शहर का बस अपनी भूख मिटाये ।।

No comments

Post a comment