Monday, 3 October 2016

डोकरी

 
हाथां पकड़्यो भाल डोकरी
मोडा खाग्या माल डोकरी
हेत जताकर जमीं हड़प ली,
फंसी कुजरबी चाल डोकरी।
 
घर रा कागद गेणै मेल्या,
घरकां ओदी घाल डोकरी।
लाव निकळगी पग हेटै सूं,
पछै पड़ी पड़ताल डोकरी।
हिरण्यां हाथी कीर हारता,
सालै हिय बै साल डोकरी।

हाण हट्यां पछ लाण बण्योड़ी
बैठी माथो झाल डोकरी।
नुगरा जीम्या बिण नूंतै ई,
गया बजाता गाल डोकरी।

बेटो मौन, बहू रा गाड़ा,
झिलै जीता दिन झाल डोकरी।
कलजुग रै कुड़कै फंस कढगी,
खड़्ये ना'र री खाल डोकरी।

निकळ्या नाजोगा घरवाळा,
पण तूँ रही दयाल डोकरी।
प्रीत दया परतीत पखै तूँ
मुलकां बणी मिसाल डोकरी।
 
डॉ गजादान चारण'शक्तिसुत'

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