Wednesday, 16 July 2014

बारह बरिस लै कूकर जीऐं !

बारह बरिस लै कूकर जीऐं, औ तेरह लौ जिऐं सियार ।
बरिस अठारह छत्री जिऐं, आगे जीवन को धिक्कार ।

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