Friday, 6 July 2018

राजा त्रैलोक्यवर्मन चन्देल - मुसलमानों को हरा कर कलिंजर दुर्ग पर पुनः अधिकार करने वाले राजा (1205-1241 ई.)

राजा त्रैलोक्यवर्मन चन्देल -
मुसलमानों को हरा कर कलिंजर दुर्ग पर पुनः अधिकार करने वाले राजा (1205-1241 ई.)




राजा त्रैलोक्यवर्मन चन्देल (1205-1241 ई.) - जब कुतुबुद्दीन एबक ने कालिंजर पर अभियान किया तब राजा परमर्दिदेव दुर्ग से निकल मैदान में युद्ध के लिए आये । लेकिन मैदान युद्ध के दौरान जब उन्हें नुकसान होने लगा तो वह वापिस दुर्ग में जाकर लड़ने लगे, परन्तु हार और विनाश निश्चित हो जाने पर राजा परमर्दिदेव ने संधी की बात चलाई । यह प्रक्रिया चल ही रही थी कि राजा परमर्दिदेव कि मृत्यु हो गई ।


राजा कि मृत्यु के बाद राजा परमर्दिदेव के मंत्री अनदेव ने संधी नहीं कि और युद्ध करना शुरू किया । उस समय अकाल के कारण पानी की कमी थी जिसे पहाड़ों के स्रोत से आपूर्ति होती थी। मुसलमानों ने इस पानी को रोक दिया । इस कारण चन्देलों ने दुर्ग को कुतुबुद्दीन को सौंप दिया । उसने वहां के सभी मंदिर तोड़े, खूब धन लूटा और कई हजार लोगों को गुलाम बना कर मुसलमान बना दिया ।


कुतुबुद्दीन एबक ने कालिंजर के बाद चन्देलों के प्रसिद्ध नगर महोबा को भी ले लिया, परन्तु कुतुबुद्दीन के चले जाने के दो वर्ष बाद राजा परमर्दिदेव चन्देल के पुत्र त्रैलोक्यवर्मन (1205-1241 ई.) ने झांसी के पास ककदवा गांव में मुसलमानों को हरा कर कलिंजर दुर्ग पर पुनः अधिकार कर लिया । उसने इस युद्ध में काम आए बाउता सामन्त के पूर्वज के लिए दान दिया । त्रैलोक्यवर्मन का अंतिम शिलालेख 1241 ई. तक उसे स्वतन्त्र राजा प्रमाणित करता है । (सल्तनत काल में हिन्दू प्रतिरोध - डॉ. अशोक कुमार सिंह, बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय वाराणसी की पीएच.डी. हेतु स्वीकृत शोध ग्रंथ, पृष्ठ 133)

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