Thursday, 28 December 2017

महाराजा महिपाल तोमर, दिल्ली (1033 ई.)

महाराजा महिपाल तोमर, दिल्ली (1033 ई.)


(सल्तनत काल में हिन्दू प्रतिरोध - डॉ. अशोक कुमार सिंह, बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय वाराणसी की पीएच.डी. हेतु स्वीकृत शोध ग्रंथ, पृष्ठ 72)


जब कन्नौज का प्रतिहार साम्राज्य निर्बल हो गया तो राजस्थान के चौहान और तोमर राजाओं ने 1192 ई. तक देश की सफलतापूर्वक रक्षा की थी।


Rajasthan Through the । हमें -I-Pag मे 527 and 534 में डॉ. दशरथ शर्मा लिखते हैं कि
"Rajasthan has reason to be proud of rulers like Mahipal Tomar and Vigrahraj IV (Bisaldev) of Sakambhari who brushing aside the question of the safety of their own kingdoms fought for their compatriots and their culture.
This fight for the independence and culture of the Country for four hundred years or more, must be regarded as one of the greatest contributions made by Rajasthan".


1043 ई. में कई राजपूत राजाओं ने दिल्लीपति महीपाल तोमर या कुमारपालदेव तोमर के नेतृत्व में पंजाब के मुस्लिम क्षेत्रों पर धावे किए और हांसी और थानेश्वर आदि हस्तगत कर लिए ।


नगरकोट को जीत कर उन्होंने लाहौर का घेरा डाला जो 7 महीने तक चला । वहां मुसलमानों ने उन पर अचानक हमला किया जिसके परिणामस्वरूप इन राजपूतों को लौटना पड़ा परन्तु फिर भी उन्होंने नगर कोट और हांसी पर अधिकार बनाए रखा ।
इन राजपूत राजाओं में भोज परमार की सेना और करण कलचुरी तथा अणहल चौहान मुख्य थे।


दिल्लीपति राजा महिपाल तोमर का काल- हरिहर निवास द्विवेदी (1105-1130 ई.) मानते हैं ।
The struggle for Empire भारतीय विद्या भवन, मुंबई ।

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