Friday, 29 December 2017

चांदावत मेड़तिया |

चांदावत मेड़तिया |




वीरमदेव के पुत्र चांदा ने बाझाकुंडो की भूमि पर अधिकार कर वि.सं.1603 में बलुन्दा को आबाद किया । चांदा राव मालदेव की सेवा में रहे, मालदेव द्वारा मेड़ता पर आक्रमण करते समय चांदा उनके साथ में थे ।
मालदेव के भयभीत होने पर उन्होंने जोधपुर पहुँचाया । राव मालदेव ने उन्हें ऐक बार आसोप और रास का पट्टा भी दिया था ।

हुसेन कुलिखां द्वारा जोधपुर पर आक्रमण करने के समय चांदा चन्द्रसेन के पक्ष में लड़े । नागौर के सुबायत हुसेन अली से भी कई लड़ाइया लड़ी । नागौर के नवाब ने उन्हें धोखे से मारना चाहा । इस षड़यंत्र में चांदा तो मरे पर नवाब को भी साथ में लेकर मरे ।

बलुन्दा इनका मुख्या ठिकाना था, धनापो, दूदड़ास, सूदरी, कुडकी, डाभडो, खानड़ी, बडवालो, सेवरीयो, आजडाली, लाडपूरा, सुंथली, हासीयास, पूजीयास, लायी, मुगधडो, देसवाल, नौखा, नोवड़ी, ओलादण, गागुरडो, मागलियास, डोगरानो, अचाखेड़ो, रेवत, रोहल, छापर बड़ी, पीड़ीयो, रोहीना, बसी, सिराधनो, बाखलियाच, चिवली आदी ऐक ऐक गाँव के ठिकाने थे ।

मेवाड़ के शाहपुर राज्य में खामोर चांदावतों का ठिकाना था । ये बलुन्दा ठिकाने से शाहपुरा गए |

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