Wednesday, 9 September 2015

सूरा

सूरा


सह देसां सूरा हुवा, लङिया जोर हमेस ।
सिर कटियां लङनो सखि, इण धर रीत विसेस ।।

हे सखि !
सभी देशों में शूर-वीर हुए हैं, जो सदैव वीरता से लङे हैं ।
किन्तु सिर कटने के उपरान्त भी युद्ध करना तो 
केवल इस देश की ही विशेष परम्परा है ।।

लेखक - आयुवान सिंह हुडील

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