Wednesday, 9 May 2018

प्रभावशाली व्यक्ति के विरुद्ध जब एक राजपूत न्यायधीश ने दिया फैसला तो हो गया स्थानांतरण

मेरी जीवन गाथा - ओंकार सिंह बाबरा -



मैं तिजारा से अपना स्थानान्तरण चाहता था, अतः जब भी जयपुर जाता तो इसके लिये प्रयास करता एक अनुभवी परिचित अधिकारी ने सुझाव दिया कि ‘या तो स्थानीय राजनेताओं को प्रसन्न करो या उसकी बाहें मरोड़ो तो अपने आप स्थानान्तरण हो जाएगा।’ मैं राजनेताओं को प्रसन्न नहीं करना चाहता था। वास्तव में मैं तो अधिकांश राजनेताओं के कार्यकलापों और आचरण से उनके प्रति अनादर का भाव रखता था। मेरे न्यायालय में एक ऐसा प्रकरण आया जिसमें राजनेताओं की भी रुचि थी। यह प्रकरण नीमराणा का था, नीमराणा स्वतंत्रता से पहले एक अर्द्धस्वतंत्र छोटी-सी रियासत थी। वहाँ के एक सेठ को कपड़ा, शक्कर और केरोसिन बेचने का लाइसेन्स मिला हुआ था। ये तीनों वस्तुएँ राशनकार्ड के आधार पर ही बेची जानी थी। सेठ बहुत समय तक कानून की अवहेलना करके अवैध कमाई करता रहा।

जनता में असंतोष की आवाज उठी तो अलवर की भ्रष्टाचार निरोधक पुलिस ने जाँच करने के बाद सेठ को गिरफ्तार किया। आरोपी ने अदालत से जमानत ले ली। उसका प्रकरण अलवर राज्य में चला और राजस्थान बनने के पश्चात् कई न्यायालयों में यह प्रकरण चलता रहा। जब भी कोई न्यायाधिकारी निष्पक्षभाव से सेठ के विरुद्ध रुख दिखाता तो सेठ न्यायाधीश पर पक्षपात का आरोप लगाकर उस न्यायालय से प्रकरण को स्थानान्तरित करवा लेता। अब यह प्रकरण मेरे न्यायालय में था। केस की फाइल बहुत बड़ी और पुरानी थी। फाइल के कई कागज फटने के कगार पर थे। सेठ को आशंका थी कि मैं उसके विरुद्ध निर्णय दूंगा, तो उसने राजनेताओं का सहारा लिया।

उस काल में राज्य मंत्रिमण्डल में अलवर क्षेत्र के एक मंत्री मास्टर भोलानाथ थे। मंत्री महोदय तिजारा के दौरे पर आये। मैं उनसे विश्राम गृह में मिलने गया तो उन्होंने क्षेत्र की कानून-व्यवस्था पर चर्चा की उनके पास ही नीमाराणा वाला सेठ बैठा था, उसका परिचय कराते हुए मंत्रीजी ने कहा कि ये अपने क्षेत्र के बड़े प्रभावशाली और सज्जन व्यक्ति हैं। बातचीत के पश्चात् मंत्रीजी सेठ और अन्य कार्यकर्ताओं के काफिले को लेकर नगर की ओर चले गये। बाद में मैंने सेठ के प्रकरण के विषय में निर्णय दिया जिसके अनुसार उस पर तीन लाख रुपये का जुर्माना और 6 महीने की सख्त कैद की सजा सुनाई। इस निर्णय के 15 दिन बाद ही मेरा स्थानान्तरण हो गया। परिचित अधिकारी द्वारा बताया गया नुस्खा काम कर गया। स्थानान्तरण से मुझे आश्चर्य हुआ, मुझे चिंता थी कि कहीं गलत स्थान पर स्थानान्तरण न हो जाय परन्तु यह जानकर प्रसन्नता हुई कि मेरा स्थानान्तरण खेतड़ी के उपखण्ड अधिकारी (एस.डी.ओ.) पद पर हुआ।

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