Thursday, 28 December 2017

महाराजा भोज परमार (1011-1055 ई.)

महाराजा भोज परमार (1011-1055 ई.)



धार, मालवा 1019 ई. में भोज ने आनन्दपाल शाही के पुत्र राजा त्रिलोचन पाल की महमूद गजनी के विरूद्ध सहायता की । दक्षिणी राजस्थान भोज के अधीन था । 1043 ई. में उसने भारत की रक्षार्थ हिन्दू राजाओं की सहायता में सेना भेजी जिसने मुस्लिम आक्रमणकारियों से हाँसी, थानेश्वर, नगर कोट को विजय किया और लाहौर का 7 मास तक घेरा दिया ।


भोज का उदयपुर शिलालेख किसी तोग्गल को हराने का उल्लेख करता है।
जी. बुहलर के अनुसार शायद वह कोई गजनी का सेनापति रहा होगा। (पूर्ववर्ती मुस्लिम अक्रान्ताओं का भारतीयों द्वारा प्रतिरोध डॉ. रामगोपाल मिश्रा पृष्ठ 104)


मुसलमानी आक्रमणों के विरूद्ध किए गए संघर्षों के लिए भोज की मृत्यु के बहुत बाद तक उन्हें गहड़वाल शिलालेखों में आदरपूर्वक स्मरण किया है। उसने धार में 'सरस्वती कंठाभरण' विद्यालय बनवाया था जिसे बाद में मुसलमानों ने तोड़ कर कमाल मौला मस्जिद बना दी थी।
इसके समय में गुरूड़ पुराण लिखा गया जिसमें सरस्वती की पूजा और गरूड़ शक्ति जगा कर कलि भुजंग विदेशी मुसलमान आक्रमणकारियों को नष्ट करने की शिक्षा दी गई।


भोज की सरस्वती प्रतिमा आजकल लन्दन में रखी है और वह सुन्दर है। सरकार ने भोपाल हवाई अड्डे का नाम राजा भोज एयरपोर्ट कर दिया है। (The Struggle for Empire- HTáîų fè ETT Hqit, gr&iš gerð 66)

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