Wednesday, 12 October 2016

कार्य व मार्गदर्शन की अवास्तविक मांग :-

कार्य व मार्गदर्शन की अवास्तविक मांग : श्री देवीसिंह जी महार

आज लोग कहते हैं - " हम काम करना चाहते है, लेकिन हमको कोई काम देने वाला नहीं है | हम सामाजिक व आध्यात्मिक दोनों क्षेत्रों में मार्गदर्शन के लिए तड़प रहे है लेकिन हमको कोई मार्गदर्शन देने वाला नहीं है | " यह दोनों की मांगे पूरी तरह से असत्य व अपने आप को धोखे में डालने वाली है |

जो कार्य करना चाहता है , उसको काम करने से संसार की कोई शक्ति नहीं रोक सकती और जो मार्ग को खोजना चाहता है , उसे मार्ग को प्राप्त करने से कोई भी... शक्ति नहीं रोक सकती | काम की मांग करना अपनी निष्क्रियता पर पर्दा डाल कर अपने आप को भ्रमित करना है |

लोग कहते है कि हम श्री क्षत्रिय युवक संघ में काम करना चाहते है | हम काम तब करें , जब हमको कोई अधिकृत व्यक्ति काम करने के लिए कहे | अगर हम वास्तविकता में जाएँ तो यह कथन कतई सही नहीं है , क्योंकि इस कथन के साथ भी दुराग्रह जुड़े हुए है | क्षत्रिय युवक संघ कोनसा है ? इसकी परिभाषा भी हम करें | उस प्रकार से हो तो हमें स्वीकार है अन्यथा नहीं | काम क्या हो व कैसा हो ? यह भी हम कहें जैसे तो तो ठीक है है अन्यथा गलत | फिर काम व मार्गदर्शन की मांग कहाँ रह जाती है ? यह सब निष्क्रियता को छिपाने के बहाने है |

अगर कोई व्यक्ति समाज मै काम करना चाहता है तो उसे कौन रोक रहा है ? समाज मै हजारों तरह की बुराइयाँ है , उनके निवारण केलिए उतने ही कार्यक्षेत्र है | हम कार्य क्षेत्र में उतर सकते है , लोगों से सहयोग मांग सकते है | सहयोग मिलेगा व कार्य होगा , किन्तु यह सब कुछ हम करना नहीं चाहते है | हम तो पड़े पड़े नेता बनना चाहते है , पद चाहते है व यश चाहते है | यह सब उपार्जन की वस्तुएं है , जिनको हम बिना श्रम किये प्राप्त करना चाहते है , जिसकी कोई संभावना नहीं है |

आज हमारी निष्क्रियता कि अवस्था यहाँ तक दयनीय हो गई है कि कार्य करना व शाखायें चलाने की बात तो दूर रही , महीनों व वर्षों तक आपस में मिलते नहीं , फिर भी दुसरे लोगों के बारे मै बिना जाने , पड़े पड़े निंदा व आलोचना करते रहते है ।

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