Thursday, 6 August 2015

हठिलो राजस्थान

हठिलो राजस्थान 



सिर देणो रण खेत मैं, स्याम-धरम हित चाह ।
सुत देणो मुख मौत मैं, इण घर रूङी राह ।।

अर्थात् -
रण-क्षेत्र में अपना मस्तक अर्पित करना, स्वामी का हमेशा हित चिन्तन करना व अपने पुत्रों को भी स्वधर्म पालन के लिए मौत के मुँह में धकेलना इस राजस्थान की धरती की परम्परा रही है ।।

लेखक - आयुवानसिंह हुडील

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