Sunday, 24 September 2017

सम्राट भोजदेव रघुवंशी प्रतिहार (प्रथम) आदिवराह कन्नौज (836-882 ई.)

सम्राट भोजदेव रघुवंशी प्रतिहार (प्रथम) आदिवराह 
कन्नौज (836-882 ई.)

प्रतिहार राजपूतों का मूल स्थान गुजरात-राजस्थान था । मंडोर और भीनमाल इनकी पुरानी राजधानियां थी । 550 ई. के बाद वे प्रसिद्धि में आए ।

728 ई. के पूर्व उन्होंने उज्जैन मालवा जीता और 795-833 ई. के बीच नागभट्ट द्वितीय ने कन्नौज पर अधिकार कर लिया । उनके पुत्र राजा रामभद्र की 836 ई. में मृत्यु के बाद, उनके पुत्र भोजदेव प्रथम कन्नौज के सम्राट बने ।

सम्राट भोजदेव प्रतिहार प्रथम भारत के महान शासकों में से एक था वह सैन्य विध्या का ज्ञाता था । सुलेमान अरब यात्री 851 ई. में लिखता है कि भोज की विशाल सेना थी, सुन्दर घुङ सेना थी, देश समृद्ध था, अरबी मुसलमानों को देश के लिये घातक समझता था । राजमार्ग डाकुओं से मुक्त थे । भोज का राज्य उत्तरप्रदेश, मध्यप्रदेश, राजस्थान, सौराष्ट्र, दक्षिणी-पूर्वी पंजाब तथा बिहार के कुछ भाग तक विस्तृत था । कन्नौज उसकी राजधानी थी ।

अल मसुदी लिखता है कि जब भी अरबों को सिंध से निकालने के लिए भोज सैनिक प्रयास करने लगता है, अरबी मुसलमान मुल्तान में स्थित सूर्य मन्दिर तोङने का डर दिखाते है, जिसके कारण राजा भोज रुक जाता है ।

भगवान श्रीराम के भाई लक्ष्मण, राम के प्रतिहारी थे इसी कारण लक्ष्मण के वंशज प्रतिहार कहलाते थे ।प्रतिहार वंश में भोज महानतम था । वह यशस्वी और सागर के समान शान्त था । वह निरभिमान, उज्ज्वल चरित्र, अच्छा प्रशासक और बुराई मिटाने वाला था । वह ऐसा मृदुभाषी था कि जैसे भगवान राम थे ।

भोज एक विजेता और महान सम्राट था जिसने 46 वर्ष तक धर्म की रक्षा की थी । भारता उस पर सदा गर्व करता रहेगा ।

भोजदेव भगवती के उपासक थे और उन्होंने बहुत से मंदिर देवी-देवताओ के बनवाए थे और उनका विरुद आदि वराह था जो कि विष्णु के अवतार के रुप में भार की रक्षा अरब के मुसलमान आक्रमणकारियों से कर रहा था ।

सम्राट महिपाल प्रथम की 942-43 ई. में मृत्यु के बाद प्रतिहार साम्राज्य निर्बल होने लगा और महमूद गजनवी ने 1018 में उसे समाप्त कर दिया ।

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