Saturday, 1 August 2015

विवेकानन्द

चार आदमी मिलकर कोई काम करे, यह हमारी आदत नहीं । इसलिए हमारी इतनी दुर्दशा हो रही है । जो आज्ञापालन करना जानते हो, वे ही आज्ञा देना भी जानते हैं ।पहले आदेशपालन करना सीखो । इन पाश्चात्य जातियों में स्वाधीनता का भाव जैसा प्रबल है, आदेशपालन करने का भाव भी वैसा ही प्रबल है । हम सभी अपने आपको बङा समझते हैं, इससे कोई काम नही बनता । महान उधम, महान साहस, महावीर्य और सबसे पहले आज्ञापालन - ये सब गुण व्यक्तिगत या जातिगत उन्नति के लिए एकमात्र उपाय हैं ।और, ये गुण हममें हैं ही नहीं ।

- स्वामी विवेकानन्द ।।

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