Monday, 8 December 2014

चंवर ढुले नह सिंह सिर

चंवर ढुले नह सिंह सिर



चंवर ढुले नह सिंह सिर, छत्र नह धरै सिंह !
हाथल रा बळ सूं हुवे, ओ वनराज अबीह !!

सिंह के सिर पर चंवर नही ढुलते, न वह छत्र धारण करता है !
वह तो अपनी हाथल के बल पर ही निडर होकर वन का राजा बना रहता है !!

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